Natural Vegetables: भाई साहब, आजकल पेट खराब रहना आम बात हो गई है कभी गैस, कभी कब्ज, कभी अपच डॉक्टर कहते हैं प्रोबायोटिक्स लो अब ये नाम सुनते ही लगता है कि कोई महंगी दवा लेनी पड़ेगी लेकिन सच्चाई क्या है पता है? Probiotics आपकी रसोई में ही पड़े हैं वो भी बिलकुल देसी, सस्ते और बिना किसी साइड इफेक्ट के चलो आज आसान भाषा में समझते हैं, बिना घुमाए फिराए।
पेट खुश तो शरीर खुश Probiotics का सीधा मतलब
भाई, प्रोबायोटिक्स का मतलब है
पेट के अच्छे बैक्टीरिया।
ये अच्छे बैक्टीरिया:
- खाना सही से पचाते हैं
- गैस और जलन कम करते हैं
- इम्युनिटी बढ़ाते हैं
- शरीर को अंदर से मजबूत रखते हैं
जब पेट ठीक रहता है तो दिमाग भी शांत रहता है और शरीर भी हल्का लगता है।
दही ही नहीं, सब्ज़ियों में भी है ताकत
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि प्रोबायोटिक्स सिर्फ दही या दवाइयों में होते हैं लेकिन भाई, हमारी देसी सब्ज़ियाँ भी पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करती हैं।
खासकर जब
- सब्ज़ी ज्यादा तली न हो
- हल्की पकी या कच्ची हो
- कभी-कभी खमीरी (fermented) रूप में हो
दादी-नानी के ज़माने में ये सब बिना नाम जाने लोग खाते थे, और पेट की बीमारी कम ही होती थी।
गोभी, गाजर और मूली पेट की देसी तिकड़ी
भाई, सबसे पहले बात करते हैं इन तीन की।
गोभी
अगर गोभी को हल्का पका कर या खमीरी रूप में खाया जाए तो ये पेट के लिए बहुत अच्छी होती है।
गाजर
गाजर सिर्फ आँखों के लिए नहीं है इसमें फाइबर होता है, जो पेट साफ रखता है और अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है।
मूली
मूली गैस और अपच में रामबाण है इसके पत्ते भी बहुत फायदेमंद होते हैं तीनों मिलकर पेट को अंदर से साफ रखते हैं।
प्याज़ और लहसुन – रोज़ का सस्ता सुपरफूड
भाई, प्याज़ और लहसुन तो हर घर में होते हैं लेकिन लोग इनकी ताकत नहीं समझते।
प्याज़
प्याज़ पेट के अच्छे बैक्टीरिया को खाना देता है जिससे वो और मजबूत बनते हैं।
लहसुन
लहसुन खराब बैक्टीरिया को खत्म करता है और अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ने देता है अगर लहसुन कच्चा या हल्का पका हो तो फायदा और ज्यादा होता है।
कैसे खाएं ताकि सच में फायदा मिले?
अब सबसे जरूरी सवाल खाएं कैसे?
भाई, तरीका याद रखो
- सब्ज़ी को ज्यादा तलो मत
- रोज़ थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाओ
- कच्चा सलाद ज़रूर शामिल करो
- कभी-कभी खमीरी चीज़ें भी खा सकते हो
और सबसे बड़ी बात नियमित खाओ, कभी-कभी नहीं। प्राकृतिक चीज़ें धीरे असर करती हैं,
लेकिन असर पक्का करती हैं।
आखिरी बात, भाई दवा नहीं, रसोई पर भरोसा
भाई साहब, हर बात की दवा मेडिकल स्टोर में नहीं मिलती बहुत सी दवाइयाँ तो रसोई में ही रखी होती हैं जो काम महंगे प्रोबायोटिक कैप्सूल करते हैं वही काम ये देसी सब्ज़ियाँ भी कर सकती हैं बस फर्क इतना है कि ये धीरे काम करती हैं लेकिन बिना नुकसान के तो अगली बार सब्ज़ी बनाते वक्त ये मत सोचो कि क्या बनाऊँ ये सोचो कि पेट और शरीर को क्या चाहिए क्योंकि सेहत की असली शुरुआत रसोई से ही होती है।