Homebound: कुछ फिल्में शोर नहीं मचातीं, बस दिल में उतर जाती हैं। Neeraj Ghaywan की Homebound भी कुछ ऐसी ही है। बिना बड़े स्टार्स, बिना तामझाम के, इस फिल्म ने सीधा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बना ली। जब खबर आई कि Homebound Oscars 2026 की शॉर्टलिस्ट में शामिल हो गई है, तो भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए ये किसी सपने से कम नहीं था।

Oscars 2026 की शॉर्टलिस्ट में नाम आना क्यों बड़ी बात है?

Oscars की शॉर्टलिस्ट में पहुंचना आसान नहीं होता। यहां हर देश अपनी बेहतरीन फिल्म भेजता है, और वहीं से असली मुकाबला शुरू होता है। Homebound का यहां तक पहुंचना इस बात का सबूत है कि कहानी अगर सच्ची हो, तो भाषा, देश और सीमाएं मायने नहीं रखतीं। सीधी सी बात है ये सिर्फ Neeraj Ghaywan की जीत नहीं, पूरे भारत की जीत है।

Neeraj Ghaywan: जो शोर नहीं, सच्चाई दिखाते हैं

Neeraj Ghaywan का नाम सुनते ही एक चीज़ साफ होती है ये निर्देशक ग्लैमर नहीं, ज़िंदगी दिखाते हैं। Masaan से लेकर Homebound तक उनकी फिल्मों में आम इंसान की पीड़ा, उम्मीद और संघर्ष नजर आता है। उन्होंने फिर साबित कर दिया कि बड़ी कहानियां बड़े सेट से नहीं, ईमानदार नजरिए से जन्म लेती हैं।

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 Homebound’ की कहानी ने दिल क्यों छू लिया?

Homebound की कहानी किसी एक इंसान की नहीं है। ये हर उस शख्स की कहानी है, जो कहीं फंसा हुआ है यादों में, रिश्तों में, या हालातों में। फिल्म में कोई ज़ोरदार डायलॉगबाज़ी नहीं, बस खामोशियां हैं, जो बहुत कुछ कह जाती हैं। यही वजह है कि विदेशी जूरी को भी ये फिल्म अपनी लगी।

सोशल मीडिया पर खुशी और गर्व की लहर

जैसे ही खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर खुशी की बाढ़ आ गई। लोग लिख रहे हैं यही है असली भारतीय सिनेमा। Homebound ने दिखा दिया कि कंटेंट राजा है। कई फिल्ममेकर और कलाकारों ने Neeraj Ghaywan को बधाई दी। हर कोई एक ही बात कह रहा है अब दुनिया भारत की कहानियों को गंभीरता से सुन रही है।

अब सवाल ये है क्या अगला कदम और बड़ा होगा?

Oscars की शॉर्टलिस्ट में पहुंचना मंज़िल नहीं बस एक मजबूत शुरुआत है। अब निगाहें अगले ऐलान पर टिकी हैं। क्या Homebound फाइनल नॉमिनेशन तक पहुंचेगी? ये तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है Neeraj Ghaywan ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब सिनेमा दिल से बनाया जाए, तो पूरी दुनिया उसे महसूस करती है। और शायद यही तो असली जीत है।