असम की घटना जिसने इंसानियत को शर्मसार किया

असम की यह दिल दहला देने वाली घटना पूरे देश को हिला रही है। एक गांव में पति-पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी गई, सिर्फ़ जादू-टोने के शक के आधार पर। आरोप है कि गांव वालों ने पति-पत्नी को घेर लिया, उनकी पिटाई की और फिर उन्हें जिंदा जला दिया। यह घटना दिखाती है कि आज के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास कितना जानलेवा हो सकता है। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और न्यूज़ रिपोर्ट्स में गुस्सा और दुख साफ दिख रहा है।

क्या है पूरा मामला और कैसे भड़की भीड़?

पुलिस के मुताबिक, यह घटना असम के एक दूरदराज के गांव में हुई, जहां हाल ही में कुछ लोग बीमार पड़े थे और एक-दो मौतें भी हुई थीं। बिना किसी सबूत के, गांव वालों ने इन घटनाओं के लिए पति-पत्नी को दोषी ठहराया। अफवाहें और डर धीरे-धीरे भीड़ में बदल गए। आरोप है कि गांव परिषद जैसी किसी औपचारिक व्यवस्था का सहारा लेने के बजाय, लोगों ने कानून अपने हाथ में ले लिया और पति-पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी।

आज भी जादू-टोने के आरोप मौत की वजह क्यों बनते हैं?

लोग सोच रहे हैं कि आज भी जादू-टोने के आरोप क्यों लगते हैं? विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अशिक्षा, डर, बीमारियों के बारे में सही जानकारी की कमी और सामाजिक जागरूकता की कमी इसके मुख्य कारण हैं। जब कोई समस्या आती है, तो लोग तर्क का इस्तेमाल करने के बजाय किसी व्यक्ति को दोष देना आसान समझते हैं। असम में पति-पत्नी की हत्या जैसी घटनाएं, जहां गांव वालों ने जादू-टोने के शक में उन्हें जिंदा जला दिया, दिखाती हैं कि अंधविश्वास अभी भी समाज में गहराई से जमा हुआ है।

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पुलिस की कार्रवाई और कानून क्या कहता है

घटना के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। असम सहित कई राज्यों में जादू-टोना विरोधी कानून मौजूद हैं, फिर भी ऐसी घटनाएं कानून के कमजोर अमल पर सवाल उठाती हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हिंसा करने की हिम्मत न करे।

समाज के लिए एक चेतावनी और सबक

यह घटना सिर्फ़ एक अपराध नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। जिस तरह से फंक आर्किटेक्ट्स शिकागो जैसी फर्मों द्वारा दिखाए गए योजनाबद्ध सोच और जागरूकता शहरों को बेहतर बनाती है, उसी तरह समाज को सुरक्षित बनाने के लिए शिक्षा और वैज्ञानिक सोच ज़रूरी है। अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना और कानून को सख्ती से लागू करना बहुत ज़रूरी है। जब तक डर और अफवाहें खत्म नहीं हो जातीं, तब तक ऐसी दुखद घटनाओं का खतरा बना रहेगा।