परिचय (Introduction)

I Want To Talk: फ़िल्मी दुनिया में, कुछ कहानियाँ सिर्फ़ देखने से कहीं आगे निकल जाती हैं; वे भावनाओं को जगाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है निर्देशक शूजित सरकार की नवीनतम फ़िल्म, “आई वांट टू टॉक”, जिसने न सिर्फ़ दर्शकों को प्रभावित किया, बल्कि अभिषेक बच्चन को उनके करियर का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान भी दिलाया—70वें हुंडई फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार 2025 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार। गुजरात पर्यटन के सहयोग से आयोजित इस फ़िल्मफ़ेयर नाइट के दौरान, अभिषेक ने ब्लैक लेडी को अपने हाथों में थामा तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। इस भावुक पल में उनके चेहरे पर गर्व और विनम्रता के साथ-साथ 25 साल की कड़ी मेहनत की चमक भी झलक रही थी।

अभिषेक बच्चन का भावुक पल: “मैंने कितनी बार इस भाषण की प्रैक्टिस की थी” (Abhishek Bachchan’s emotional moment: “I practiced this speech so many times”)

अभिषेक ने स्टेज पर आते हुए कहा,

“इस साल मैं फिल्म इंडस्ट्री में 25 साल पूरे कर रहा हूं, और याद नहीं कितनी बार इस अवॉर्ड के लिए भाषण प्रैक्टिस किया। यह मेरे लिए एक सपना है, और इसे अपने परिवार के सामने पाना बहुत खास है।”

इस मौके पर जया बच्चन, श्वेता बच्चन, और नव्या नवेली नंदा भी मौजूद थीं। अहमदाबाद के EKA एरीना में हुई इस सेरेमनी ने एक यादगार रात को जन्म दिया।

Featured

“I Want To Talk” — एक दिल को झकझोर देने वाली कहानी

फिल्म “I Want To Talk” की कहानी अर्जुन सेन नाम के एक व्यक्ति पर आधारित है — एक पत्रकार, लेखक और स्ट्रोक सर्वाइवर, जिसने अपने जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ते हुए लोगों को आशा और आत्मविश्वास का संदेश दिया।

फिल्म में अर्जुन की भूमिका निभाते हैं अभिषेक बच्चन, और कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने अपने करियर का सबसे इमोशनल और इन्टेंस रोल किया है।

क्या “I Want To Talk” एक वास्तविक कहानी है?

हाँ, यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है।
अर्जुन सेन एक वास्तविक व्यक्ति हैं, जिन्होंने 2006 में एक गंभीर हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक झेला था। उन्होंने कई सर्जरी के बाद धीरे-धीरे बोलने और चलने की क्षमता वापस पाई। उनकी आत्मकथा “Rebuilding Arjun” पर ही यह फिल्म loosely आधारित है।

लोग पूछ रहे हैं: Is “I Want to Talk” a good movie? (People are asking: Is “I Want to Talk” a good movie?)

बिलकुल! दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने फिल्म को एक भावनात्मक मास्टरपीस बताया है।
IMDb पर फिल्म को 8.7/10 रेटिंग मिली है, जबकि Metacritic Score 84/100 है — जो दर्शाता है कि यह फिल्म न केवल कमर्शियल रूप से सफल है, बल्कि क्रिटिकली भी highly acclaimed रही।

Who is Arjun Sen in I Want To Talk? (आई वांट टू टॉक में अर्जुन सेन कौन हैं?)

फिल्म में अर्जुन सेन का किरदार एक कम्युनिकेशन एक्सपर्ट और मोटिवेशनल स्पीकर का है, जो एक बड़े स्ट्रोक के बाद अपनी आवाज़ और पहचान दोनों को फिर से खोजने की यात्रा पर निकलता है।

अभिषेक बच्चन ने इस रोल के लिए महीनों तक स्पीच थेरेपिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट्स से बातचीत की, ताकि अर्जुन की जर्नी को वास्तविकता के करीब लाया जा सके।

क्या “I Want To Talk” एक सैड फिल्म है?

यह केवल एक “सैड फिल्म” नहीं है, बल्कि “Hope और Resilience” की कहानी है।
फिल्म आपको रुलाती जरूर है, लेकिन अंत में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा देती है।
कई दर्शकों ने कहा कि थिएटर से निकलते समय उनके दिल में सिर्फ एक शब्द था — “Respect”

Is I Want To Talk flop? (क्या आई वांट टू टॉक फ्लॉप है?)

नहीं! फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई है।
95 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म अब तक ₹312 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर चुकी है।
ओपनिंग वीकेंड में ही इसने 40 करोड़ रुपये की कमाई कर निर्माताओं की उम्मीदों से कहीं ज्यादा प्रदर्शन किया।

How many surgeries did Arjun Sen have? (अर्जुन सेन की कितनी सर्जरी हुई?)

वास्तविक जीवन में अर्जुन सेन को तीन प्रमुख सर्जरी से गुजरना पड़ा था —

  1. एक कोरोनरी बाईपास सर्जरी
  2. एक ब्रेन रीहैबिलिटेशन प्रोसिजर
  3. और बाद में एक स्पीच रिकवरी प्रोग्राम

उनकी बहादुरी ने न केवल डॉक्टरों बल्कि पूरी दुनिया को प्रेरित किया।

अर्जुन सेन कहां बड़े हुए थे? (Where did Arjun Sen grow up?)

अर्जुन सेन का जन्म कोलकाता में हुआ था और वे वहीं पले-बढ़े। बाद में उन्होंने अपनी शिक्षा IIM Bangalore से पूरी की और एक सफल मार्केटिंग प्रोफेशनल बने। अमेरिका में रहते हुए उन्हें जीवन का सबसे बड़ा झटका लगा — लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी

क्या अभिषेक बच्चन ने फिल्म के लिए सिर मुंडाया था? (Did Abhishek Bachchan shave his head for the film?)

हाँ!
फिल्म की ऑथेंटिसिटी बनाए रखने के लिए अभिषेक बच्चन ने अपना सिर पूरी तरह मुंडवाया, ताकि किरदार की रियल लाइफ मेडिकल कंडीशन से मेल खा सके।
उन्होंने शूटिंग से पहले 4 महीने का वर्कशॉप भी अटेंड किया था जिसमें उन्हें आंशिक पैरालिसिस के एक्सप्रेशंस और बॉडी लैंग्वेज सीखनी पड़ी।

Who is Reya in I Want To Talk? (आई वांट टू टॉक में रेया कौन है?)

रेया का किरदार सई तम्हणकर ने निभाया है।
वह अर्जुन की पत्नी हैं, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर पूरी फिल्म में साथ खड़ी रहती हैं।
उनका रोल फिल्म की भावनात्मक रीढ़ कहा जा सकता है।

Is Abhishek Bachchan’s new movie a remake (क्या अभिषेक बच्चन की नई फिल्म रीमेक है)

नहीं, I Want To Talk किसी फिल्म का रीमेक नहीं है।
यह एक मौलिक कहानी है जो वास्तविक जीवन से प्रेरित है। हालांकि कई दर्शकों ने इसकी तुलना The King’s Speech और My Left Foot जैसी फिल्मों से की है, लेकिन इसकी आत्मा और भावनाएं पूरी तरह भारतीय हैं

What is a Metacritic Score? (मेटाक्रिटिक स्कोर क्या है?)

Metacritic Score एक फिल्म या शो की औसत क्रिटिक रेटिंग होती है, जो 100 में से दी जाती है।
“I Want To Talk” को मिला 84/100, जो इसे 2025 की टॉप फिल्मों में शुमार करता है।

Is “Talk to Me” actually scary? (क्या “मुझसे बात करो” वास्तव में डरावना है?)

अगर आप इस फिल्म को हॉरर से जोड़ रहे हैं तो नहीं, “Talk to Me” और “I Want To Talk” दो बिल्कुल अलग फिल्में हैं।
पहली हॉरर जॉनर की है, जबकि दूसरी बायोग्राफिकल ड्रामा

Is “I Can” based on a true story? (क्या “आई कैन” एक सच्ची कहानी पर आधारित है?)

“I Can” एक अलग फिल्म है, लेकिन “I Want To Talk” की तरह यह भी इंस्पिरेशनल थीम पर आधारित है।
दोनों में समानता बस इतनी है कि ये दोनों मानव आत्मा की शक्ति को दर्शाती हैं।

Filmfare 2025: जीतने वाले नाम

Best Actor (Male): अभिषेक बच्चन (I Want To Talk) और कार्तिक आर्यन (Chandu Champion)
Nominees:

  • अजय देवगन (Maidaan)
  • अक्षय कुमार (Sarfira)
  • ऋतिक रोशन (Fighter)
  • राजकुमार राव (Stree 2)

कार्तिक आर्यन ने कहा,

“यह मेरे लिए एक सपना है। जब मैंने पहली बार मुरलीकांत पेटकर की कहानी सुनी, तो लगा यह सिर्फ जीत की नहीं, बल्कि खुद पर विश्वास की कहानी है।”

निवारण (Redressal)

“आई वांट टू टॉक” एक जीवन दर्शन को मूर्त रूप देने वाली फिल्म होने के अपने दर्जे से आगे निकल जाती है—यह दर्शाती है कि खामोशी के बाद उभरती आवाज़ सबसे शक्तिशाली हो सकती है। अभिषेक बच्चन के अभिनय ने यह दर्शाया है कि वह सही पटकथा और सच्ची भावनाओं के साथ किसी भी किरदार को सिर्फ़ चित्रित करने के बजाय, उसे मूर्त रूप दे सकते हैं।