थिएटर के बाहर भीड़, सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग नाम, और हर जगह एक ही सवाल—टॉर्चर या ब्लॉकबस्टर? ‘द राजा साब’ पर दर्शकों का फैसला। लंबे इंतजार के बाद जब ‘द राजा साब’ रिलीज़ हुई, तो उम्मीदें बहुत ज़्यादा थीं। एक बड़ा स्टार, भारी-भरकम बजट, और ज़ोरदार प्रमोशन ने पहले ही फिल्म को चर्चा का विषय बना दिया था। लेकिन जैसे ही पहले शो खत्म हुए, दर्शकों की राय बंटी हुई दिखी। कुछ ने इसे पैसे वसूल एंटरटेनर बताया, तो कुछ ने इसे तीन घंटे का टॉर्चर कहा। ऐसे में असली सच्चाई जानना ज़रूरी हो जाता है।
पहले दिन माहौल कैसा था?
रिलीज़ के पहले दिन, थिएटर के बाहर का माहौल किसी त्योहार से कम नहीं था। सुबह से ही टिकट काउंटर पर फैंस दिखे। शुरुआती शो के बाद तालियों और सीटियों की आवाज़ें आईं, लेकिन कुछ चेहरे निराश भी दिखे। कई दर्शकों ने कहा कि फिल्म का पहला हाफ उन्हें बांधे रखता है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी लड़खड़ा गई। सोशल मीडिया रिव्यू से भर गया, कुछ लोग फिल्म को ब्लॉकबस्टर कह रहे थे तो कुछ इसे ओवरहाइप्ड बता रहे थे। यहीं से सवाल गहरा गया—टॉर्चर या ब्लॉकबस्टर? ‘द राजा साब’ पर दर्शकों का आखिरी फैसला क्या है?
कहानी ने दर्शकों को कितना बांधे रखा?
‘द राजा साब’ की कहानी एक दमदार आइडिया पर आधारित है, लेकिन इसके एग्जीक्यूशन पर सवाल उठ रहे हैं। फिल्म की शुरुआत ज़ोरदार होती है, और किरदारों की एंट्री प्रभावशाली लगती है। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कई सीन खींचे हुए लगते हैं। कुछ दर्शकों को लगा कि फिल्म में बहुत ज़्यादा मसाला (कमर्शियल एलिमेंट) है लेकिन इमोशनल गहराई की कमी है। दूसरी ओर, फैंस का एक तबका इसे पूरी तरह से मनोरंजक बता रहा है। कहानी को लेकर यह मतभेद फिल्म के बारे में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है, और दर्शक खुद तय कर रहे हैं कि यह टॉर्चर है या ब्लॉकबस्टर।
एक्टिंग और स्टार पावर का असर
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके स्टार और उनकी एक्टिंग को माना जा रहा है। लीड रोल में एक्टर ने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। चाहे एक्शन सीक्वेंस हों या इमोशनल सीन, स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी दमदार है। सपोर्टिंग कास्ट ने भी अच्छा काम किया है, हालांकि कुछ किरदार अधूरे लगते हैं। फैंस का कहना है कि स्टार पावर के बिना फिल्म को शायद ऐसा रिस्पॉन्स नहीं मिलता। यही वजह है कि “टॉर्चर या ब्लॉकबस्टर? द राजा साब” पर फैसला काफी हद तक एक्टर की पॉपुलैरिटी से जुड़ा हुआ लगता है।
सोशल मीडिया रिव्यू इतने निर्णायक क्यों बन गए?
आज की दुनिया में, किसी भी फिल्म का भविष्य सोशल मीडिया पर तय होता है। ‘द राजा साब’ भी इसका अपवाद नहीं थी। रिव्यू वीडियो ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर तेज़ी से वायरल हुए। कुछ यूज़र्स ने फिल्म को पैसे वसूल बताया, जबकि कुछ ने इसे सिरदर्द कहा। मीम्स और ट्रोल ने भी फिल्म को ट्रेंड में बनाए रखा। खास बात यह है कि नेगेटिव और पॉजिटिव रिव्यू दोनों बराबर संख्या में आए। यह डिजिटल चर्चा तय कर रही है कि आम दर्शक थिएटर जाएगा या नहीं।
बॉक्स ऑफिस के आंकड़े क्या बताते हैं?
पहले वीकेंड के बॉक्स ऑफिस के आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। ओपनिंग अच्छी थी, लेकिन फिल्म की असली परीक्षा वर्ड ऑफ माउथ से शुरू हुई। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म की कमाई का ग्राफ पूरी तरह से दर्शकों की राय पर निर्भर करेगा। अगर फैंस का सपोर्ट जारी रहा, तो फिल्म ब्लॉकबस्टर बन सकती है। लेकिन अगर नेगेटिव चर्चा हावी रही, तो गिरावट तय है। तो सवाल वही है—टॉर्चर या ब्लॉकबस्टर? द राजा साब पर दर्शकों का फैसला ही अंतिम फैसला होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल दर्शकों के मन में सवाल
क्या ‘द राजा साब’ परिवार के साथ देखने लायक है?
फिल्म एंटरटेनमेंट और एक्शन से भरपूर है, लेकिन कुछ सीन लंबे और तेज़ गति वाले लग सकते हैं। परिवार के साथ देखने से पहले कहानी और ट्रीटमेंट पर विचार करना बेहतर होगा।
क्या यह फिल्म सिर्फ फैंस के लिए है?
कई दर्शकों का मानना है कि यह फिल्म सिर्फ स्टार के फैंस को ही सच में पसंद आएगी। आम दर्शकों को कहानी थोड़ी खींची हुई लग सकती है।
क्या यह सच में साल की सबसे बड़ी फिल्म है?
बजट और स्टार पावर के आधार पर उम्मीदें निश्चित रूप से ज़्यादा थीं, लेकिन कंटेंट के मामले में यह अभी भी बहस का विषय है।
क्या यह फिल्म सच में टॉर्चर है?
यह पूरी तरह से दर्शक की पसंद पर निर्भर करता है। कुछ को यह टॉर्चर लगी, जबकि कई इसे ब्लॉकबस्टर एंटरटेनर कह रहे हैं।
क्या इसे थिएटर में देखना चाहिए या OTT पर?
अगर आप बड़े पर्दे पर शानदार अनुभव और स्टार पावर देखना चाहते हैं, तो थिएटर जाना सही रहेगा। वरना, आप OTT रिलीज़ का इंतज़ार कर सकते हैं।
निष्कर्ष
आखिर में, टॉर्चर या ब्लॉकबस्टर? द राजा साब पर दर्शकों के फैसले को एक लाइन में नहीं बताया जा सकता। यह फिल्म उम्मीदों, हाइप और स्टार पावर का मिक्सचर है। कुछ लोगों के लिए यह एक शानदार एंटरटेनर है, जबकि दूसरों के लिए यह निराशाजनक है। आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस और दर्शकों का वर्ड-ऑफ-माउथ ही इसका असली भविष्य तय करेगा। एक बात तो साफ है – ‘द राजा साब’ ने निश्चित रूप से चर्चा पैदा की है, और आज के समय में यही काफी है।