UPSC: अरे भाई, कल शाम मैं अपने दोस्त छोटू के साथ चाय की दुकान पर बैठा था। वही पुरानी दुकान मिट्टी का चूल्हा, कड़क चाय और राजनीति से लेकर पड़ोस की बातें तक सब वहीं तय होता है। तभी छोटू मोबाइल घूरते हुए बोला यार, UPSC-वूपीएससी बड़ी चीज़ होती है क्या? हर कोई इसी का ढोल क्यों पीटता है? मैंने चाय का घूंट लिया और बोला अबे पगले! आज तुझे एक ऐसी कहानी सुनाता हूँ कि तेरा मोबाइल भी शर्मा जाए। छोटू बोला, “बोल जल्दी, चाय ठंडी हो रही है। मैंने कहा, देख,
अरे भाई! मिस्त्री की बेटी ने UPSC को दो-दो बार हिला दिया
ये कहानी है एक बिजली मिस्त्री की बेटी की। घर में इतना पैसा नहीं कि AC चले, लेकिन दिमाग ऐसा कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा UPSC दो बार पास कर ली! छोटू चौंका दो बार? एक बार में तो हमारे मोहल्ले के शर्मा जी के बेटे की हवा निकल गई थी! मैं हँसते हुए बोला यही तो मज़ा है कहानी का। गरीबी थी, दिक्कतें थीं, लेकिन हिम्मत और मेहनत उससे भी बड़ी थी।
जहाँ घर में पंखा भी सोच-समझकर चलता था, वहाँ UPSC दो बार क्लियर!
उस लड़की के पिता बिजली मिस्त्री थे। मतलब दिनभर तार जोड़ना, स्विच ठीक करना और महीने के आखिर में हिसाब लगाना कि बिजली का बिल पहले भरें या किराना लें। ऐसे माहौल में पढ़ाई करना मतलब जब घर में शोर हो, तब भी किताब खोलकर बैठ जाना। छोटू बीच में बोला मतलब पढ़ाई भी टॉर्च की रोशनी में हुई होगी क्या? मैंने मुस्कुराकर कहा हो सकता है! लेकिन असली रोशनी तो उसके इरादों में थी। वो लड़की स्कूल में शुरू से ही होशियार थी, लेकिन होशियार होना अलग बात है और UPSC जैसी परीक्षा जीतना अलग। उसके पास न महंगे कोचिंग के पैसे थे, न बड़े शहर की सुविधाएँ। फिर भी उसने ठान लिया कि कुछ बड़ा करना है सिर्फ अपने लिए नहीं, अपने माँ-बाप के लिए भी।
गरीबी बोली मैं हार गई! बिजली मिस्त्री की बेटी बनी अफसर
छोटू ने सिर खुजलाया यार, हम तो दो दिन मोबाइल छोड़ दें तो हाथ काँपने लगता है। मैंने कहा और उसने सालों तक आराम छोड़ दिया। दोस्तों की शादियाँ, त्योहार, घूमना सब साइड में रख दिया। पहली बार उसने UPSC पास किया। पूरा गाँव खुश ढोल बजे, मिठाई बँटी। लोग बोले देखो, मिस्त्री की बिटिया अफसर बन गई! लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उसने कहा नहीं, अभी और बेहतर करना है। और फिर दूसरी बार UPSC जीत लिया! अब तो छोटू, पूरा देश कहने लगा अरे, ये तो इतिहास रच रही है। छोटू हँसते हुए बोला मतलब UPSC भी बोलेगा बहन, थोड़ा आराम कर लो!
ना कोचिंग, ना पैसा फिर भी UPSC दो बार! गाँव की बिटिया का कमाल
मैंने कहा बस यही फर्क है सपने देखने वालों और उन्हें पूरा करने वालों में। इस कहानी से एक बात साफ है गरीबी कभी रुकावट नहीं बनती, अगर जिद पक्की हो। हालात चाहे जैसे हों, अगर मेहनत और आत्मविश्वास साथ हों तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। मैंने छोटू से कहा देख भाई, बहाना बनाना आसान है पैसे नहीं, समय नहीं, सुविधा नहीं। लेकिन ये लड़की सबके मुँह पर जवाब है। चाय खत्म हो चुकी थी। छोटू मोबाइल जेब में डालते हुए बोला यार, आज सच में कुछ सीख लिया। कल से थोड़ी कम रील्स देखूँगा। मैं हँस पड़ा और बोला बस इतना ही काफी है। UPSC नहीं तो कम से कम अपने सपनों की परीक्षा तो पास कर ले!